Gersa Dam broken: 35 साल पुराना गेरसा बांध टूटा… कई एकड़ धान की फसल नष्ट, ग्रामीणों ने विभाग पर लापरवाही का लगाया आरोप

On: Saturday, September 6, 2025 5:01 PM
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Gersa Dam broken: लुण्ड्रा ब्लॉक में करीब 35 साल पुराने गेरसा बांध का मेड़ शनिवार को टूट गया। बांध टूटने से लगभग 30 एकड़ फसल डूबने और खराब होने की आशंका जताई जा रही है।

अंबिकापुर। Gersa Dam broken: अंबिकापुर जिले के लुंड्रा ब्लॉक में शनिवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। ग्राम पंचायत गेरसा स्थित करीब 35 साल पुराना गेरसा बांध अचानक टूट गया। बांध टूटने से आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया। हादसे में लगभग 25 से 30 एकड़ क्षेत्र में लगी धान की फसल पूरी तरह डूबकर बर्बाद हो गई

ग्रामीणों ने बताया कि सुबह करीब 9 बजे चरवाहों ने बांध से तेज आवाज और पानी के बहाव की आवाज सुनी। मौके पर जाकर देखा तो बांध का मेड़ करीब 3 मीटर तक टूट चुका था और तेज रफ्तार से पानी बाहर निकल रहा था। गनीमत यह रही कि बांध के निचले हिस्से में कोई बस्ती नहीं थी, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। हालांकि, किसानों की फसल पूरी तरह चौपट हो गई।

प्रशासन मौके पर, मरम्मत शुरू

घटना की सूचना मिलते ही सरगुजा कलेक्टर विलास भोस्कर, प्रशासनिक अमला और जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। पानी का बहाव कम होने के बाद मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया है। जल संसाधन विभाग के EE अशोक निरंजन ने बताया कि बांध के किनारे का हिस्सा टूटा था, जिससे ज्यादा क्षति नहीं हुई। वर्तमान में बांध में करीब 10 मीटर पानी भरा हुआ है।

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Gersa Dam broken: विभाग पर लापरवाही के आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई सालों से बांध की न तो मरम्मत की गई और न ही निरीक्षण। जबकि शुक्रवार रात से ही रिसाव हो रहा था। समय रहते ध्यान न देने से बांध शनिवार सुबह टूट गया।

Gersa Dam broken: 1988 में हुआ था बांध का निर्माण

गेरसा बांध का निर्माण वर्ष 1988 में हुआ था। इसकी सिंचाई क्षमता 84 हेक्टेयर है। यह छोटा बांध है। करीब 35 वर्ष पुराने इस बांध में इस वर्ष हुई भारी बारिश के कारण पानी लबालब भर गया था। बांध के मेड़ के उपरी हिस्से से पानी लगातार रिस रहा था। ग्रामीणों के अनुसार विभाग ने सालों से इस बांध की मरम्मत नहीं की है और न ही निरीक्षण किया गया।

बता दें कि पिछले कुछ दिनों से उत्तरी छत्तीसगढ़ के इलाकों में भारी बारिश हुई है। जिस कारण सभी नदी-नाले और जलाशय लबालब भरे हुए हैं। ऐसे में पुराने हो चुके बांध रखरखाव के अभाव में नष्ट हो रहे हैं। जिससे जान-माल का नुकसान हो रहा है। लुत्ती जलाशय के हादसे में 7 लोगों की जान चली गई वहीं 50 से ज्यादा मवेशी मारे गए थे। वहीं अब इस बांध के टूटने से किसानों के धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है।

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