Jalpari Jaisa Baccha: छत्तीसगढ़ में हुआ ‘जलपरी बेबी’ का जन्म, देखकर डॉक्टर- नर्स भी रह गए हैरान… जानें आखिर क्या है मामला?

On: Friday, October 3, 2025 6:04 PM
Jalpari Jaisa Baccha: छत्तीसगढ़ में हुआ 'जलपरी बेबी' का जन्म, देखकर डॉक्टर- नर्स भी रह गए हैरान… जानें आखिर क्या है मामला?
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Jalpari Jaisa Baccha: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला अस्पताल में ‘जलपरी’ जैसे बच्‍चे का जन्‍म हुआ है, जिसके पैर व शरीर की बनावट देखकर खुद डॉक्‍टर भी चौंक गए।

धमतरी। Jalpari Jaisa Baccha: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला अस्पताल में एक दुर्लभ मामला सामने आया है। यहां बुधवार को एक महिला ने ऐसे बच्चे को जन्म दिया, जिसकी शारीरिक संरचना ने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया। नवजात के दोनों पैर आपस में जुड़े हुए थे और वह जलपरी (मरमेड) की तरह दिखाई दे रहा था। जन्म के लगभग 3 घंटे बाद शिशु की मौत हो गई।

Jalpari Jaisa Baccha: जानें पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, 28 वर्षीय महिला 8 महीने की प्रेग्नेंट थी और लेबर पेन के बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद डॉक्टरों ने डिलीवरी कराई। इस दौरान सामने आया कि नवजात को ‘मरमेड सिंड्रोम’ या ‘सिरेनोमेलिया’ नामक दुर्लभ बीमारी थी। दुनिया में अब तक ऐसे सिर्फ 300 केस सामने आए हैं। भारत में यह महज पांचवां मामला है और छत्तीसगढ़ में पहला।

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डॉक्टरों ने बताया शिशु के बारे में

डिलीवरी कराने वाली डॉक्टर रागिनी सिंह ठाकुर ने बताया कि बच्चे का ऊपरी हिस्सा सामान्य रूप से विकसित था। आंख, नाक और हार्ट बने थे लेकिन रीढ़ की हड्डी से नीचे का हिस्सा पूरी तरह से विकसित नहीं था। कमर से नीचे पैर फ्यूज होकर पूंछ की तरह बने हुए थे। जननांग भी विकसित नहीं थे। बच्चे का वजन लगभग 800 ग्राम था। जन्म के बाद बच्चा जिंदा था और उसे ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया, लेकिन करीब 3 घंटे बाद उसकी मौत हो गई।

डॉ. रागिनी ने बताया कि अब तक अपने करियर में उन्होंने दूसरा ऐसा मामला देखा है। इस स्थिति के कारण का पता स्पष्ट रूप से नहीं लगाया जा सकता, हालांकि गर्भावस्था के दौरान कुछ दवाओं का सेवन या अन्य कारण इसे प्रभावित कर सकते हैं।

Jalpari Jaisa Baccha: क्या है मरमेड सिंड्रोम

मरमेड सिंड्रोम या सिरेनोमेलिया एक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात विकार है। इसमें शिशु का निचला हिस्सा विकसित नहीं हो पाता और दोनों पैर आपस में जुड़ जाते हैं, जिससे वे जलपरी की पूंछ की तरह दिखते हैं। ऐसे बच्चों का जीवनकाल सामान्यतः कुछ घंटे या कुछ दिन ही होता है।

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