Raipur Tomar Brothers: छत्तीसगढ़ पुलिस को आखिरकार 151 दिन बाद बड़ी सफलता मिली है। रायपुर का कुख्यात सूदखोर और ब्लैकमेलिंग गिरोह से जुड़ा आरोपी वीरेंद्र सिंह उर्फ रूबी तोमर पुलिस के हत्थे चढ़ गया है।
रायपुर। Raipur Tomar Brothers: छत्तीसगढ़ पुलिस को आखिरकार 151 दिन बाद बड़ी सफलता मिली है। रायपुर का कुख्यात सूदखोर और ब्लैकमेलिंग गिरोह से जुड़ा आरोपी वीरेंद्र सिंह उर्फ रूबी तोमर पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। पुलिस ने उसे ग्वालियर (मध्य प्रदेश) से गिरफ्तार किया है। वहीं, उसका भाई रोहित तोमर अब भी फरार बताया जा रहा है। दोनों भाई जून से पुलिस की पकड़ से बाहर थे और लगातार छापेमारी के बावजूद पुलिस को चकमा दे रहे थे।
जानकारी के अनुसार, रायपुर पुलिस ने दोनों पर इनाम घोषित किया था और उनकी अग्रिम जमानत याचिका हाल ही में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी। इसके बाद से पुलिस लगातार दोनों की लोकेशन ट्रेस कर रही थी। इसी दौरान ग्वालियर में छिपे होने की जानकारी मिली, जिसके बाद रायपुर और ग्वालियर पुलिस की संयुक्त टीम ने एक विशेष ऑपरेशन चलाकर वीरेंद्र तोमर को गिरफ्तार कर लिया। ग्वालियर पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए रायपुर पुलिस को सूचित किया है।
सड़क मार्ग से रायपुर लाया जा रहा वीरेंद्र तोमर
गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी को सड़क मार्ग से रायपुर लेकर आ रही है। रविवार को रायपुर पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी का आधिकारिक खुलासा करेगी। बताया जा रहा है कि वीरेंद्र तोमर ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कई शहरों में ठिकाने बदले थे और फर्जी नाम से किराए के मकानों में रह रहा था। आखिरकार पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर ग्वालियर में उसे दबोच लिया।
सूदखोरी और वसूली से कमाए करोड़ों
वीरेंद्र सिंह तोमर और उसका भाई रोहित तोमर लंबे समय से सूदखोरी और ब्लैकमेलिंग के अवैध कारोबार में सक्रिय थे। आरोप है कि यह गिरोह जरूरतमंद लोगों को ऊंचे ब्याज पर कर्ज देता था और फिर उनसे मूलधन से कई गुना ज्यादा रकम वसूल करता था। जब लोग पैसे लौटाने में असमर्थ होते, तो उनसे जबरन वसूली, धमकी और मारपीट की जाती थी।
रायपुर के कई थानों में वीरेंद्र तोमर और उसके परिवार के खिलाफ सूदखोरी, जबरन वसूली, मारपीट, आर्म्स एक्ट और ब्लैकमेलिंग जैसे करीब 16 आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने पहले भी उनके ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें ब्लैंक चेकबुक, हथियार, कारतूस और दस्तावेजों का जखीरा बरामद किया गया था।
हाईकोर्ट ने की थी अग्रिम जमानत याचिका खारिज
हाल ही में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वीरेंद्र और रोहित तोमर की अग्रिम जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि दोनों आरोपियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। कोर्ट के आदेश के बाद रायपुर पुलिस ने दोनों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी थी।
कुर्क हुई करोड़ों की संपत्ति
तोमर बंधुओं के खिलाफ जिला प्रशासन ने भी सख्त कार्रवाई की थी। रायपुर जिला प्रशासन की टीम ने दोनों भाइयों की कई करोड़ों रुपए की संपत्ति कुर्क की थी। इस दौरान उनके आलिशान ऑफिस, मकान, जमीन और लग्जरी कारों पर भी कार्रवाई की गई थी। प्रशासन की टीम ने दोनों भाइयों के दफ्तर पर बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण ढहाया था।
रोहित तोमर की तलाश जारी
गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस की नजर वीरेंद्र के भाई रोहित तोमर पर है, जो अब भी फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने उसकी तलाश में कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी है। रायपुर पुलिस का कहना है कि रोहित की गिरफ्तारी भी जल्द की जाएगी।
अपराध की जड़ तक पहुंचने की तैयारी
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने की तैयारी में है। जांच में यह भी सामने आया है कि तोमर गिरोह ने कई प्रभावशाली लोगों से संबंध बनाकर सूदखोरी का जाल फैला रखा था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इनसे और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं और किसने इन्हें सहयोग दिया। रायपुर पुलिस का कहना है कि वीरेंद्र तोमर की गिरफ्तारी से प्रदेश में चल रहे सूदखोरी और ब्लैकमेलिंग के अवैध कारोबार पर बड़ा असर पड़ेगा।






