Madvi Hidma: मैं बूढ़ी हो चुकी हूं, बेटे का शव नहीं ला सकती…. हिड़मा की मौत के बाद मां ने पुलिस से लगाई मार्मिक गुहार, जानें मास्टरमाइंड के बारे में

On: Wednesday, November 19, 2025 3:45 PM
मैं बूढ़ी हो चुकी हूं, बेटे का शव नहीं ला सकती…. हिड़मा की मौत के बाद मां ने पुलिस से लगाई मार्मिक गुहार, जानें मास्टरमाइंड के बारे में
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Madvi Hidma: हिडमा की मौत के बाद बूढ़ी मां ने पुलिस से मार्मिक गुहार लगाई। पुलिस से भावुक अपील करते हुए कहा है कि मैं बूढ़ी हो चुकी हूं… बेटे का शव नहीं ला सकती

जगदलपुर। Madvi Hidma: नक्सल इतिहास का सबसे क्रूर और खूंखार चेहरा 1.80 करोड़ रुपए का इनामी माड़वी हिड़मा आखिरकार मारा गया। मंगलवार सुबह उसकी पत्नी राजे और चार अन्य नक्सलियों को आंध्रप्रदेश के मरेडमिल्ली के जंगल में ढेर कर दिया गया। हिडमा की मौत के बाद उसके गांव पुवर्ती में मातम पसरा हुआ है। गांव की गलियों में सन्नाटा है।

बता दें कि हिडमा की मौत के बाद बूढ़ी मां ने पुलिस से मार्मिक गुहार लगाई। पुलिस से भावुक अपील करते हुए कहा है कि मैं बूढ़ी हो चुकी हूं… बेटे का शव नहीं ला सकती। पुलिस मेरे बेटे का शव गांव ले आए, ताकि मैं अंतिम संस्कार कर सकूं। बता दें कि बेटे की मौत के बाद मां के आंखों में आंसू और खामोशी है।

बीते 25 साल में सबसे ज्यादा खून बहाया

हिड़मा ने बीते 25 साल में सबसे ज्यादा खून बहाया। उसका खूनी रिकार्ड बताता है कि उसने दो दर्जन से ज्यादा बड़े हमलों का सीधे नेतृत्व किया। फील्ड में एके-47 के साथ वह जवानों पर हमला किया करता था। हर बड़ी घटना की एफआईआर में उसका नाम अब भी लिखा हुआ है।

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हिड़मा का खूनी रेकॉर्ड

  • 1981 में हिड़मा का पूर्वर्ती में जन्म।
  • 90 के अंत में नक्सल संगठन से जुड़ा।
  • 2000 में हथियार फैक्ट्री से जुड़ा।
  • 2007 में उपल मेटा में हिड़मा के नेतृत्व में हमला, 24 जवान शहीद।
  • 2008 -09 में पहली बार हिड़मा बटालियन नंबर 1 का कमांडर बना।
  • 2011 में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य बना।
  • 2013 में झीरम घाटी कांड का मास्टरमाइंड कहलाया।
  • 2022 में सेंट्रल कमेटी मेंबर बनाया गया।

हिड़मा की बर्बता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सलवा जुडूम के दौर में उसने 2006 में एर्राबोर में 31 ग्रामीणों को राहत शिविर में जिंदा जला डाला था।

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