Kete extension: केते एक्सटेंशन को मिली वन एवं पर्यावरण की मंजूरी, पूर्व CM बोले- अडाणी के नाम हुआ जंगल… TS सिंहदेव ने कही ये बड़ी बात

On: Thursday, November 27, 2025 4:45 PM
Kete extension: केते एक्सटेंशन को मिली वन एवं पर्यावरण की मंजूरी, पूर्व CM बोले- अडाणी के नाम हुआ जंगल… TS सिंहदेव ने कही ये बड़ी बात
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Kete extension: ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ से लगे हसदेव अरण्य क्षेत्र में केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को छत्तीसगढ़ सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग ने मंजूरी दे दी है।

अंबिकापुर। Kete extension: छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक का मुद्दा गर्म हो गया है। राज्य के वन विभाग ने 1,742.6 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की सिफारिश केंद्र को भेजी थी, जिसके बाद केते एक्सटेंशन के लिए वन एवं पर्यावरण की मंजूरी मिल गई है।

बता दें कि इस मंजूरी के बाद राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड जयपुर की कंपनी द्वारा 1742 हेक्टेयर संरक्षित वन भूमि पर पेड़ों की कटाई के बाद कोल खनन किया जाएगा। पर्यावरण विभाग द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि इससे साबित होता है कि भाजपा को जनता और जनहित की चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज्य की जनता के साथ मिलकर इस मंजूरी का भरपूर विरोध करेगी।

वहीं केते एक्सटेंशन खदान का विरोध कर रहे टीएस सिंहदेव ने छत्तीसगढ़ सरकार के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। टीएस सिंहदेव ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने के रास्ते तलाशे जाएंगे।

Kete extension: भूपेश बघेल ने कही ये बात

केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक के लिए डायवर्सन की मंजूरी दिए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया है। भूपेश ने लिखा है- अडाणी के नाम हुआ जंगल, छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने भारी विरोध के बावजूद केते एक्सटेंशन के लिए वन एवं पर्यावरण की मंजूरी दे दी है। मतलब कि 1700 हेक्टेयर जंगल की कटाई होगी। ऐतिहासिक महत्व वाली रामगढ़ की पहाड़ियों पर खतरा मंडराता रहेगा। कांग्रेस राज्य की जनता के साथ मिलकर इस मंजूरी का भरपूर विरोध करेगी।

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दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय, गलत जानकारी दी: टीएस

वहीं पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने कहा कि यह निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है। रामगढ़ पहाड़ी को संभावित नुकसान के कारण यह ज्यादा चिंताजनक है। हम लोग देखेंगे कि इसमें कानूनी सहायता ली जा सकती है या नहीं। हाईकोर्ट जाने के विकल्प तलाशे जाएंगे।

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Kete extension: पत्र में लिखी गई ये बात

विभाग द्वारा जारी पत्र में लिखा गया है कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 के अंतर्गत केते एक्सटेंशन के लिए वन भूमि के व्यपवर्तन का प्रस्ताव प्रधान मुख्य वन संरक्षक (भू-प्रबंध), नोडल अधिकारी से पत्र प्राप्त हुआ है। इसके अनुसार आवेदनकर्ता अधीक्षण अभियंता (फ्यूल) राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड, ज्योतिनगर जयपुर द्वारा सरगुजा वनमंडल अंतर्गत केते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल माइंस (Kete extension) एंड पिट हेड कोल वाशरी प्रोजेक्ट के लिए 1742.60 हेक्टेयर संरक्षित वनभूमि को गैर वानिकी कार्य के लिए मांग रखी गई है।

पत्र में उल्लेख है कि वन मंडलाधिकारी सरगुजा द्वारा भी उक्त भूमि के आबंटन होने का उल्लेख किया गया है। इसके बाद वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने (Kete extension) इसे मंजूरी दे दी है।

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