Tiger death case: सूरजपुर में करंट लगाकर बाघ के शिकार की घटना को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने इस मामले में राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) से व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ जवाब तलब किया है।
सूरजपुर। Tiger death case: छत्तीसगढ़ में बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, सूरजपुर जिले के गुरु घासीदास-तैमोर-पिंगला टाइगर रिजर्व अंतर्गत घुई वन परिक्षेत्र के भैसामुंडा सर्किल स्थित रेवटी क्षेत्र में एक नर बाघ का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद किया गया था। बाघ के शरीर पर चोट के निशान मिलने से शिकार की आशंका जताई जा रही है।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब प्रदेश पहले से ही बाघों की लगातार हो रही मौतों को लेकर चर्चा में है। इससे पहले कोरिया जिले में करीब सात माह पूर्व एक बाघ का शव मिला था, जिसके बाद वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी। अब सूरजपुर में सामने आए इस नए मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान लगा दिया है।
करंट लगाकर शिकार का मामला, हाईकोर्ट सख्त
सूरजपुर में करंट लगाकर बाघ के शिकार की घटना को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने इस मामले में राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) से व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि प्रदेश में वन्यजीवों, विशेषकर बाघों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने अब तक क्या ठोस इंतजाम किए हैं। साथ ही यह भी जानना चाहा गया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या रणनीति और कार्ययोजना बनाई गई है।
बाघ के अंग गायब होने का आरोप
जानकारी के अनुसार, 15 दिसंबर को बाघ का शव मिलने के बाद कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि बाघ के नाखून गायब हैं। वहीं दूसरी ओर सूरजपुर के डीएफओ ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि बाघ के सभी अंग सुरक्षित हैं। विभाग का कहना है कि शव 3 से 4 दिन पुराना है, जिससे यह संभावना कम हो जाती है कि तस्करों ने बाघ का शिकार किया हो।
वन अधिकारियों का तर्क है कि यदि बाघ का शिकार तस्करों द्वारा किया गया होता, तो उसकी खाल समेत अन्य महत्वपूर्ण अंग भी गायब होते। हालांकि, शव के पास कपड़े में लिपटा लोहे का एक हथियार मिलने से संदेह और गहरा गया है। इसके अलावा बाघ का एक नाखून गायब होना शिकार या तस्करी की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं करता।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
छत्तीसगढ़ में इससे पहले भी बाघों की संदिग्ध मौत के मामले सामने आते रहे हैं। कोरिया जिले की घटना के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाने की बात कही थी, लेकिन सूरजपुर की घटना ने उन दावों की पोल खोल दी है। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों का कहना है कि टाइगर रिजर्व में निगरानी, गश्त और तकनीकी संसाधनों की भारी कमी है।
हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी
हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि वन्यजीव संरक्षण में लापरवाही पाई गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने PCCF से व्यक्तिगत जवाब मांगकर यह स्पष्ट कर दिया है कि अब सिर्फ औपचारिक रिपोर्ट से काम नहीं चलेगा।






