Chaitanya Baghel Bail: कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चैतन्य बघेल रायपुर सेंट्रल जेल से करीब 170 दिन बाद रिहा हो गए हैं। चैतन्य बघेल के जेल से बाहर आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
रायपुर। Chaitanya Baghel Bail: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चैतन्य बघेल रायपुर सेंट्रल जेल से करीब 170 दिन बाद रिहा हो गए हैं।
चैतन्य बघेल के जेल से बाहर आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। जेल परिसर के बाहर ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई दी और समर्थक नाचते-गाते नजर आए। इस दौरान जमकर आतिशबाजी भी की गई। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता पहले से ही जेल के बाहर मौजूद थे और उन्होंने चैतन्य का जोरदार स्वागत किया।
बेटे की रिहाई पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि चैतन्य का जेल से बाहर आना उनके परिवार के लिए बेहद भावुक पल है। भूपेश बघेल ने बताया कि चैतन्य की गिरफ्तारी उसके जन्मदिन के दिन हुई थी, जबकि आज उनके पोते के जन्मदिन पर उसकी रिहाई हो रही है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के इस निर्णय पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
Chaitanya Baghel Bail: सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका लगाई थी
बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका लगाई थी। जिसमें CBI और ED की जांच की शक्तियों और उसके अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट जाने की सलाह देते हुए सुनवाई से इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा यदि ईडी की कार्रवाई और पीएमएलए कानून की वैधानिकता को चुनौती देना चाहते हैं तो अलग से याचिका दायर करें।
चैतन्य बघेल को जन्मदिन के दिन किया था गिरफ्तार
आपको बता दें कि ED ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन पर 18 जुलाई को भिलाई निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। शराब घोटाले की जांच ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपए की अवैध कमाई (पीओसी) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई।






