जान जोखिम में डाल मां ने हाथी से छीन लिया बच्चा, लेकिन नहीं बची 5 माह की मासूम की जान, छाया मातम

On: Monday, December 8, 2025 1:46 PM
जान जोखिम में डाल मां ने हाथी से छीन लिया बच्चा, लेकिन नहीं बची 5 माह की मासूम की जान, छाया मातम
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CG Elephant Attack: एक परिवार गुड़ फैक्ट्री में बाहर से मजदूरी करने आया था और काम के बाद फैक्ट्री परिसर के पास ही सो रहा था। इसी दौरान अचानक एक जंगली हाथी वहां पहुंच गया। हाथी को देखते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

सूरजपुर। CG Elephant Attack: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हाथियों के हमलों में हो रही मौतों से ग्रामीणों में भय का माहौल है और लोग हर पल अनहोनी की आशंका में जीने को मजबूर हैं। ताजा और दिल दहला देने वाली घटना सोनगरा क्षेत्र के चिकनी गांव से सामने आई है, जहां एक जंगली हाथी के हमले में महज 5 माह के मासूम बच्चे की जान चली गई।

जानकारी के अनुसार, एक परिवार गुड़ फैक्ट्री में बाहर से मजदूरी करने आया था और काम के बाद फैक्ट्री परिसर के पास ही सो रहा था। इसी दौरान अचानक एक जंगली हाथी वहां पहुंच गया। हाथी को देखते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। अपनी जान बचाने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे, लेकिन इसी भगदड़ के बीच हाथी ने पास सो रहे पांच महीने के मासूम बच्चे को अपनी सूंड में उठा लिया।

मासूम को बचाने हाथी से भीड़ गई मां

मां के लिए यह पल जिंदगी का सबसे भयावह क्षण था। अपने बच्चे को खतरे में देखकर वह जान की परवाह किए बिना हाथी के करीब पहुंच गई। मां ने साहस दिखाते हुए किसी तरह बच्चे को हाथी की सूंड से छुड़ा तो लिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गंभीर चोटों के कारण मासूम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

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परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

घटना के बाद पूरे परिवार में कोहराम मच गया। मां का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में शोक का माहौल पसरा हुआ है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की लगातार आवाजाही और हमलों के बावजूद वन विभाग द्वारा ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

ग्रामीणों में भारी आक्रोश

लगातार हो रही मौतों से स्थानीय लोगों में वन विभाग के प्रति गुस्सा बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों की मूवमेंट की समय पर सूचना नहीं दी जाती और न ही सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाते हैं। कई गांवों में न तो सोलर फेंसिंग है और न ही रात्रि गश्त की समुचित व्यवस्था, जिससे लोग पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

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