Balrampur News: बलरामपुर जिले में पुलिस हिरासत में चोरी के एक आरोपी की मौत से बवाल मचा हुआ है। पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया है, जिसके कारण तनाव की स्थिति बनी हुई है।
बलरामपुर। Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में चोरी के आरोप में गिरफ्तार किए गए एक युवक की पुलिस हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। मृतक की पहचान सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम नकना निवासी उमेश सिंह के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार, पुलिस ने उमेश सिंह को बलरामपुर में हुई एक बड़ी ज्वेलरी चोरी के मामले में गिरफ्तार किया था। यह चोरी 30-31 अक्टूबर 2025 की दरमियानी रात को हुई थी, जब चोरों ने एक ज्वेलरी दुकान का शटर उठाकर लाखों रुपए के सोने-चांदी के जेवर और करीब 3.50 लाख रुपए नकद चोरी कर लिए थे। पुलिस उमेश को चोरी के जेवर बरामद करने के लिए लेकर गई थी, तभी रास्ते में उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे तुरंत जिला अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप- “पुलिस की पिटाई से हुई मौत”
उमेश के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उमेश की मौत बीमारी से नहीं बल्कि पुलिस की बेरहमी से हुई पिटाई के कारण हुई है। उनका कहना है कि 6 नवंबर को सादी वर्दी में कुछ पुलिसकर्मी घर पहुंचे और उमेश को पकड़कर ले गए। उस दौरान ही उसे बुरी तरह पीटा गया, जिसके बाद उसकी हालत नाजुक हो गई।
परिजनों ने बताया कि उमेश को पुलिस क्राइम ब्रांच के जवान लेकर गए थे और रास्ते भर उसकी मारपीट की गई। यही वजह रही कि पूछताछ के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों ने शव लेने से किया इनकार
बलरामपुर जिला अस्पताल में युवक के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया, लेकिन परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जाती, वे शव नहीं लेंगे। इस बीच जिला अस्पताल के बाहर और बतौली थाना क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।
मृतक पहले से बीमार था
परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए एएसपी विश्व दीपक त्रिपाठी ने बताया कि उमेश सिंह पहले से ही बीमार था और सिकलसेल बीमारी से पीड़ित था। 9 नवंबर की सुबह करीब 4:20 बजे उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस का कहना है कि उमेश को पहले भी कई बार ब्लड चढ़ाया जा चुका था और उसकी तबीयत खराब रहती थी।
वहीं, उमेश के परिजन पुलिस के इन दावों को पूरी तरह झूठा बता रहे हैं। उनका कहना है कि उमेश पूरी तरह स्वस्थ था और उसे कभी कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। वे आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस ने उसे जबरन पकड़कर पीटा और बाद में बीमारी का बहाना बनाकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
विधायक ने दिए जांच के आदेश
सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि वे मृतक के परिजनों के संपर्क में हैं और पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच कराई जाएगी। विधायक ने आश्वासन दिया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पोस्टमॉर्टम मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कराया गया है ताकि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी न हो सके।






