Durg Nagar Nigam: नगर निगम कमिश्नर सुमित अग्रवाल और निगम कर्मचारी भूपेंद्र गोइर के बीच कथित वॉट्सएप चैट्स सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।
दुर्ग। Durg Nagar Nigam: छत्तीसगढ़ के दुर्ग नगर निगम से जुड़ा एक मामला इन दिनों हाईकोर्ट में खासा चर्चा का विषय बना हुआ है। नगर निगम कमिश्नर सुमित अग्रवाल और निगम कर्मचारी भूपेंद्र गोइर के बीच कथित वॉट्सएप चैट्स सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। इन चैट्स के आधार पर कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि कमिश्नर ने उससे निजी काम करवाए और मांग पूरी न होने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।
मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के जस्टिस पीपी साहू ने कर्मचारी के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही राज्य शासन और नगर निगम कमिश्नर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
निजी मांगों का आरोप, चैट्स कोर्ट में पेश
याचिकाकर्ता भूपेंद्र गोइर, जो दुर्ग नगर निगम में असिस्टेंट ग्रेड-3 के पद पर पदस्थ है, ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि कमिश्नर ने उससे कई बार निजी फरमाइशें कीं। याचिका के साथ पेश किए गए वॉट्सएप चैट्स के स्क्रीनशॉट में मूवी की कॉर्नर सीट के टिकट, 5 किलो सेब, लाल अंगूर, संतरा, 10 किलो जवा फूल चावल, गैस सिलेंडर, एसी और बंगले के वाई-फाई रिचार्ज जैसी मांगों का जिक्र है। कर्मचारी का दावा है कि जब वह इन मांगों को पूरा नहीं कर सका, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई।
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निलंबन और सेवा समाप्ति की प्रक्रिया पर सवाल
भूपेंद्र गोइर ने बताया कि उसकी नियुक्ति वर्ष 2014 में चपरासी के पद पर हुई थी और 2019 में उसे पदोन्नति देकर सहायक ग्रेड-3 बनाया गया। 31 जुलाई 2025 को कमिश्नर द्वारा नियुक्तियों में अनियमितता के आरोप लगाते हुए उसे नोटिस जारी किया गया। इसके बाद अगस्त 2025 में उसे निलंबित कर दिया गया और सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस कार्रवाई से आहत होकर कर्मचारी ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। जस्टिस पीपी साहू ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रारंभिक तौर पर जांच प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण प्रतीत होती है। जांच रिपोर्ट में गवाहों के बयान दर्ज किए बिना ही दंड का प्रस्ताव रखा गया है, जो अनुशासनात्मक प्रक्रिया की मूल भावना के विपरीत है।
कोर्ट ने फिलहाल कर्मचारी के खिलाफ किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अब इस मामले को केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक आचरण और जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है।






