Mainpat bauxite mines: छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में बॉक्साइट खदान के लिए जनसुनवाई से पहले ही शुरू विरोध शुरू हो गया है। इस दौरान जनसुनवाई के लिए लगवाए गए टेंट को लोगों ने उखाड़ दिया।
अंबिकापुर। Mainpat bauxite mines: छत्तीसगढ़ के मशहूर पर्यटन स्थल और “छत्तीसगढ़ का शिमला” कहलाने वाले मैनपाट में बॉक्साइट खदान खोलने की तैयारी ने स्थानीय लोगों में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है।
नर्मदापुर के हाथी प्रभावित इलाके कडराजा और उरंगा गांव में प्रस्तावित खदान को लेकर माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। मां कुदरगढ़ी कंपनी की ओर से आज बॉक्साइट खदान के लिए जनसुनवाई आयोजित की गई थी, लेकिन इसके पहले ही लोग विरोध में उतर आए हैं।
Mainpat bauxite mines: टेंट उखाड़कर जताया गुस्सा
सुबह से ही ग्रामीण बड़ी संख्या में जनसुनवाई स्थल पर जमा हो गए थे। जैसे ही जनसुनवाई की तैयारी शुरू हुई, लोगों ने नारेबाजी करते हुए टेंट और कुर्सियों को हटाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते पूरा पंडाल उखाड़ दिया गया। इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई, हालांकि किसी तरह की हिंसा की सूचना नहीं है।
ग्रामीणों का नेतृत्व जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग कर रही थीं। उन्होंने कहा कि मैनपाट की प्राकृतिक पहचान, हरियाली और यहाँ का शांत पर्यावरण खदानों के कारण नष्ट हो रहा है। पहले से चल रही खदानों ने हमें काफी नुकसान पहुंचाया है। रतनी नाग ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि अब कोई भी नई माइंस यहां नहीं खुलने देंगे।
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मैनपाट का पर्यावरण बर्बाद हो रहा है
कडराजा, उरंगा और आसपास के गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि बॉक्साइट खनन से लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है, जंगलों का क्षरण हो रहा है और हाथियों का रौद्र व्यवहार भी इसी कारण बढ़ा है। लोग दावा कर रहे हैं कि खदानों ने हाथियों के पारंपरिक रास्तों को (Mainpat bauxite mines) बाधित किया है, जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष बढ़ा है।
स्थानीय निवासियों ने कहा कि मैनपाट जैसी संवेदनशील और पहाड़ी जगह पर किसी भी कीमत पर नई खदानें स्वीकार नहीं की जाएंगी। उनका कहना है कि यहां की जलवायु, खेती और प्राकृतिक जैव विविधता पर खनन सीधा असर डाल रहा है।
मैनपाट पहले भी खदानों के कारण सुर्खियों में
मैनपाट पहले भी खदानों के कारण सुर्खियों में रहा है। स्थानीय आदिवासी समुदाय लंबे समय से पर्यावरणीय नुकसान, पानी की कमी और जंगलों के कटाव को लेकर विरोध दर्ज करते रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर खनन बनाम पर्यावरण संरक्षण की बहस को तेज कर दिया है। फिलहाल जनसुनवाई बाधित हो गई है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और कंपनी इस विरोध के बाद आगे क्या कदम उठाते हैं। ग्रामीणों के विरोध से यह साफ है कि मैनपाट में नई बॉक्साइट खदान खोलना आसान नहीं होगा।






